10 November, 2009

विश्लेषणात्मक टिप्पणी
संत कबीर दा जी
"पाहन पूजै हरि मिलै, तो मैं पूजूँ पहार ।
ताते या चाकि भलि, पीस खाय संसार ॥"

लोग पत्थर की पूजा करते हैं । उनका विश्वास है कि ईश्वर की मूर्ति पत्थर में बनाकर पूजा करने से उनको ईश्वर से वरदान मिल जाएगा। अगर ऐसा है तो मैं पर्वत की पूजा करूँगा। ईश्वर की मूर्ति बनानेवाली पत्थर तो पर्वत से ही आता है। इस तरह पत्थर की पूजा करने से क्या लाभ? हम को चक्की की पूजा ही करनी चाहिए, क्यों कि चक्की ही संसार के लोगों की पेट भरने के लिए काम करती है।