प्रेमचंद की ' पूस की रात कहानी ' की वीडियो यहाँ से डाउनलोड करें।
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देना बडे पुण्य का काम है।"
टीचर ने मोनू से कहा : "मोनू, इस बार तुम्हें 80% अंक लाने हैं ।" मोनू बोला : "टीचर, इस बार मैं 80% नहीं, 100% अंक लाऊँगा ।" टीचर बडी हैरान हुई : "तुम क्यों मज़ाक कर रहे हो?" मोनू : "पहले मज़ाक शुरू किसने किया था?"
टिकट चैकर आया, उसने देहाती से टिकट माँगा। इस पर वह बोला - "ई टिकिटवा का होता है?" टिकट चैकर ने उसे टिकट दिखाते हुए कहा - "यह होता है टिकट। यह पैसे देकर खरीदा जाता है।" इस पर देहाती बोला - "काहे को खरीदा जाता है, का हमरे पास दूसरा सामान नहीं है जो हम ये इतना-सा टिकिटवा खरीदेंगे ?" टिकट चैकर ने अगले स्टेशन पर ही उसे गाडी से नीचे उतार दिया। अब वह देहाती उसी रेल-पटरी पर पैदल चलने लगा जिस पर गाडी चल रही थी। इंजन ड्राईवर परेशान। वह लगातार सीटियों पर सीटियाँ मारे जा रहा था। थोडा आगे बढने पर देहाती बोला - "अब चाहे जितनी सीटी मार-मारकर हमका बुलाओ, हम तेरी गाडी में नहीं आएँगे॥"
चाहिए, इसी से पता नहीं चला कि कब बिजली चली गई?"